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Komal Bhaleshwer की डायरी

Komal Bhaleshwer

8 अध्याय
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0.0(1)

पुस्तक के भाग

1

मेरा रक्षक

5 सितम्बर 2021
5
9
0

<div>वो जिसे मैंने अपना रक्षक समझा वो ही मेरा भक्षक निकला।</div><div><br></div><div>मैं आरती, बचपन स

2

मेरा रक्षक

5 सितम्बर 2021
6
7
6

<div>वो जिसे मैंने अपना रक्षक समझा वो ही मेरा भक्षक निकला।</div><div><br></div><div>मैं आरती, बचपन स

3

खूबसूरत कविताएँ

7 सितम्बर 2021
5
12
2

<div align="left"><p dir="ltr">तुम और हम जब सफर पर चले तो दो से एक हुए<br> फिर नही चला पता कि कब हम

4

सुनो

12 सितम्बर 2021
5
12
2

<div>सुनो,तुम्हे बहुत चाहती हूँ</div><div>लेकिन तुम पहले नही मिले मुझे</div><div>सुनो,कैसे बिताऊंगी

5

हमारी हिंदी भाषा

13 सितम्बर 2021
3
8
2

<div align="left"><p dir="ltr">यूँ तो हजारों भाषाएं है यहाँ<br> लेकिन हिंदी जैसी भाषा ओर है कहाँ<br>

6

ऊपर वाले की आवाज

25 सितम्बर 2021
2
4
0

<div align="left"><p dir="ltr">आई है मुझे भी ऊपर वाले कि आवाज<br> चाहता तो वो भी है मुझे बुलाना अपने

7

एक रास्ता तुम बना देना

1 अक्टूबर 2021
3
3
1

<div align="left"><p dir="ltr">जब कोई रास्ता दिखाई ना दे तो एक रास्ता तुम बना देना<br> जब चलते चलते

8

खुशियों का ठिकाना

10 अक्टूबर 2021
1
1
0

<div align="left"><p dir="ltr">खुशी का ठिकाना अगर बाहर ढूँढोगे तो ठोकर ही खाओगे<br> गर ढूँढोगे

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